Tuesday, June 16, 2020

भारत चीन बॉर्डर पर हिंसक झड़प : भारत के 20 जवान शहीद - चीन के 43 सैनिक हताहत

LAC पर सोमवार को चीन के साथ हुई झड़प में भारत के 20 सैनिक शहीद हुए हैं। इससे पहले मंगलवार को दोपहर में एक अफसर और दो जवानों के शहीद होने की जानकारी सामने आई थी, लेकिन न्यूज एजेंसी एएनआई ने सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया कि इस झड़प में 20 सैनिक शहीद हुए हैं। बताया जा रहा है कि ये संख्या बढ़ भी सकती है बताया जा रहा कि भारतीय सेना की जवाबी कार्यवाही में चीन के भी 43 सैनिक घायल हुए या मारे गए है लेकिन चीन ने इसकी कोई पुष्टि नहीं की है।

पहले दिन में सेना ने एक बयान जारी कर कहा था कि दोनों सेनाओं के बीच हिंसक झड़प में उसका एक अधिकारी और दो जवान शहीद हुए हैं। लेकिन देर रात आये बयान में कहा गया है कि दोनों सेनाओं के सैनिकों के सोमवार रात पीछे हटने की प्रक्रिया के दौरान हुई झड़प में भारत के 17 सैनिक गंभीर रूप से घायल हो गये थे। घायल सैनिकों ने ऊंचाई वाले और दुर्गम क्षेत्र में शून्य से कम तापमान में रहने के कारण बाद में दम तोड़ दिया जिससे शहीद होने वाले सैनिकों की संख्या बढकर 20 हो गयी है।

झड़प के बाद इस विवाद को खत्म करने के लिए दोनों देशों के अफसरों के बीच बैठक चल रही है। इसके बाद एलएसी पर चीनी हैलीकॉप्टर्स की गतिविधियां बढ़ गईं। सूत्रों के मुताबिक मारे गए चीनी सैनिकों के शव और घायलों को लेने के लिए लिए ये हेलीकॉप्टर्स झड़प वाले इलाके में आए थे।

बीते पांच हफ्तों से गलवान घाटी में बड़ी संख्या में भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने खड़े थे। यह घटना भारतीय सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे के उस बयान के कुछ दिन बाद हुई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के सैनिक गैलवान घाटी से पीछे हट रहे हैं।

LAC पर हुई इस झड़प के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, जनरल बिपिन रावत और सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे के साथ बैठक हुई। वहीं, राजनाथ सिंह ने इस मामले की जानकारी प्रधानमंत्री मोदी को फोन पर दी। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पीएम आवास जाकर प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, ''सीमा प्रबंधन पर जिम्मेदाराना दृष्टिकोण जाहिर करते हुए भारत का स्पष्ट तौर पर मानना है कि हमारी सारी गतिविधियां हमेशा LAC के भारतीय हिस्से की तरफ हुई हैं। हम चीन से भी ऐसी ही उम्मीद करते हैं। हमारा अटूट विश्वास है कि सीमाई इलाके में शांति बनाए रखने की जरूरत है और वार्ता के जरिए मतभेद दूर होने चाहिए। साथ ही हम भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।"

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