Tuesday, June 23, 2020

अमेरिका ने लगाई H1-B वीजा पर रोक: Google के CEO सुंदर पिचाई ने जताई आपत्ति

अमेरिका में काम करने की इच्छा रखने वाले भारतीयों को डोनाल्ड ट्रंप सरकार ने बड़ा झटका दिया है। अमेरिका में बढ़ती बेरोजगारी को देखते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H1-B के साथ-साथ अन्य तरह के कामकाजी वीजा का सस्पेंशन फिलहाल इस साल के अंत तक के लिए आगे बढ़ा दिया है। न्यूज एजेंसी एएफपी ने यह जानकारी दी है। यानी जिन आईटी वाले लोगों का H-1B वीजा अप्रैल लॉटरी में अप्रूव हो गया था उन्हें भी अब आने की इजाजत नहीं होगी। अमेरिका ने H1-B, H2-B, J-1 व L-1 वीजा पर प्रतिबंध लगाया है, जो 24 जून 2020 से 31 दिसंबर 2020 तक लागू रहेगा।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि यह कदम उन अमेरिकियों की मदद करने के लिए आवश्यक था, जिन्होंने मौजूदा आर्थिक संकट के कारण अपनी नौकरी खो दी है। हालांकि ट्रंप प्रशासन के इस कदम की अप्रवासियों के लिए काम कर रहे मानवाधिकार समुदाय ने कड़ी आलोचना की है। इस कदम से करीब 525000 पद खाली होंगे। इससे इतने ही अमेरिका के मूल निवासियों को रोजगार मिल पाएगा।

गूगल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सुंदर पिचाई ने भी इस फैसले को गलत बताया है। उन्होंने कहा कि इमिग्रेशन की वजह से अमेरिका को इतना फायदा हुआ है। इसकी वजह से वह वैश्विक टेक लीडर बना। ट्विटर पर पिचाई ने लिखा कि वह इस निर्णय से निराश हैं। उन्होंने कहा कि हम प्रवासियों के साथ खड़े रहेंगे और उन्हें हर तरह के मौके दिलाने के लिए काम करते रहेंगे।

राष्ट्रपति ट्रंप के इस फैसले से प्रभावित होने वाले देशों में सबसे आगे भारत है क्योंकि अमेरिका में भारतीय आइटी प्रोफेशनल्स को सबसे अधिक H-1B वीजा की जरूरत होती है। इस वीजा के तहत वीजाधारक अपने बच्चों और पति/पत्नी को अमेरिका ला सकता है। वो भी उतने ही साल अमेरिका में रह सकते हैं जितना उनको लाने वाले वीजाधारक की वीजा अवधि है। एच-1बी वीजा के बाद स्थायी नागरिकता के लिए आवेदन किया जा सकता है।

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