Friday, July 17, 2020

गुरुग्राम, फरीदाबाद व सोनीपत से उठी आवाज - अब लॉकडाउन नहीं

24 मार्च से 31 मई तक लगातार लॉकडाउन के चलते ठप हुई आर्थिक गतिविधियों से परेशान लोग अब लॉकडाउन जैसे शब्द सुनकर लोग सहम जाते हैं। 18 जून को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने साफ़ कर दिया था कि दिल्ली या इससे लगते बड़े शहरों में कोरोना को लेकर एक जैसे निर्णय होने चाहिए। इसके अलावा उन्होंने कहा था कि दिल्ली से लगते हरियाणा या उत्तर प्रदेश बॉर्डर सील करने संबंधी कोई निर्णय सरकार अपने स्तर पर नहीं ले।

वहीं हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज कह रहे हैं कि दिल्ली से सटे जिलों में (फरीदाबाद, गुरुग्राम, झज्जर व सोनीपत) लॉकडाउन से ही स्थिति काबू आएगी। जबकि इन जिलों के जनप्रतिनिधि भी यही चाहते हैं कि अब यहा लॉकडाउन ना लगे। हरियाणा के  उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला भी अभी लॉकडाउन लगाने के पक्ष में नहीं है। उनका कहना है कि जैसे पूरे देश में कोरोना फैला है, हरियाणा में फिर भी काफी नियंत्रित है। माना की अधिकतम कोरोना मरीज एनसीआर में ही हैं, मगर इसके बावजूद भी वहा स्थिति बिगड़ी नहीं है। सरकार के पास स्वास्थ्य सुविधाओं सहित सभी संसाधन पूरे हैं। अब टेस्टिंग भी बढ़ाई गई है इसलिए मामले भी ज्यादा आ रहे हैं। अगर स्थिति बदतर होगी तो परिस्थितियों के अनुसार फैसला लेंगे। अभी कोरोना को जिंदगी का हिस्सा बनाकर जीना पड़ेगा। आज के दिन दिल्ली भी लॉकडाउन की तरफ नहीं जा रहा है तो हरियाणा में इस बारे में सोचना भी ठीक नहीं है।

गुरुग्राम से भाजपा विधायक सुधीर सिंगला का कहना है कि आज से 20 दिन पहले जब गुरुग्राम की स्थिति ज्यादा खराब थी तब उन्होंने ही मुख्यमंत्री से क‌र्फ्यू की माग की थी मगर अब धीरे-धीरे स्थिति काबू में आ गई है। ऐसे में क‌र्फ्यू के बारे में सोचना भी ठीक नहीं है, क्योंकि अब आर्थिक गतिविधिया पटरी पर आ गई हैं। जरा क‌र्फ्यू या लॉकडाउन के बारे में सोचते ही डर लगता है क्योंकि पहले दौर के क‌र्फ्यू व लॉकडाउन से जहा जान बची वहा जहान का काफी नुकसान हुआ। अब तो मजदूर भी अपने कारखाने के मालिक के बुलावे पर आ रहे हैं, इसलिए कोरोना के साथ ही जिंदगी की रफ्तार तेज करनी होगी। हां, कुछ क्षेत्रों में जहा ज्यादा भीड़भाड़ होती है वहां सख्ती करने की जरूरत है।

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