Friday, July 3, 2020

दोस्ती, धोखा, रेप, ख़ुदकुशी और क़त्ल - तिहाड़ जेल की अनोखी बदले की कहानी


देश की राजधानी दिल्ली में तिहाड़ जेल में एक ऐसी घटना घटित हुई जो दिल दहला देती है एक भाई ने अपनी बहन का बदला लेने के लिए खुद को जानबूझकर आरोपी बनाया। कभी-कभी जुर्म की दुनिया में कुछ ऐसी वारदातें घटित होती हैं, जिनकी कहानी किसी फिल्म से कम नहीं होती। ऐसे ही घटना अभी दिल्ली की तिहाड़ जेल भी भी घटी जिसमें बदले की आग ने एक शख्स को खूनी बना दिया।

दिल्ली की तिहाड़ जेल में सोमवार को एक कैदी ने दूसरे कैदी का तेजधार हथियार से कत्ल कर दिया। मृतक का नाम मेहताब था और मारने वाले का नाम जाकिर था । वे दोनों आपस में करीब 7 साल से दोस्त थे। दोनों का एक दूसरे के घर पर आना जाना था। मेहताब का चरित्र अच्छा नहीं था। उसने एक दिन मौका पाकर ज़ाकिर की नाबालिग बहन को अपनी हवस का शिकार बना डाला। रेप की इस घटना के बाद जाकिर की बहन ने खुदकुशी कर ली। ज़ाकिर की बहन के साथ जो कुछ हुआ वो उसे बर्दाश्त नहीं हो रहा रहा था।

जाकिर ने अब अपनी बहन के कातिल से बदला लेने की अपने मन में ठान ली थी। लेकिन बदला कैसे लेता क्योंकि मेहताब अपने जुर्म के कारण तिहाड़ जेल में था। उसने मेहताब तक पहुंचने के लिए किसी का खून करने की सोची और 20 जुलाई 2018 को दक्षिण पश्चिम दिल्ली का जैतपुर इलाका जहां जलेबी चौक में एक रिक्शेवाले को चाकू से गोद डाला जिसके कारण रिक्शेवाले की मौत हो जाती है। जब जाकिर जेल पहुंचा उस समय वह 20 साल का था।

इस मर्डर के पीछे उसका मकसद सिर्फ जेल जाना ही था, उसे तिहाड़ में उस वार्ड में रखा गया, जंहा 20 साल से कम उम्र के अपराधी रखे जाते हैं। जैसे-जैसे वक्त बीता। ज़ाकिर की उम्र 20 साल से ज्यादा हो गई। फिर उसे तिहाड़ की दूसरी जेल में शिफ्ट किया गया। लेकिन वहां जाने के बाद भी वो मेहताब की जेल से दूर था। फिर उसने एक और साजिश रची। वो अपने वार्ड के दूसरे कैदियों से प्रतिदिन मारपीट करने लगा जिसके चलते उसने जेल प्रशासन उससे तंग हो गया और उसको दूसरी जेल में शिफ्ट कर  दिया गया।

अब जाकिर और मेहताब एक ही जेल में थे, अब उसने  मेहताब को मारने का मौका तलाशना शुरू कर दिया। वो लगातार मेहताब की फिराक में था। दो-तीन दिन उस जेल में बिताने के बाद उसे मेहताब की जानकारी मिल गई। वो ये भी जान गया कि उसे मारने का सबसे बढ़िया मौका सुबह का है, जब प्रेयर के लिए बैरक खोले जाते हैं। 29 जून की सुबह जैसे ही बैरक खुली ज़ाकिर पहली मंजिल पर जा पहुंचा और वो वहां पहले से मौजूद मेहताब पर चाकू नुमा हथियार लेकर टूट पड़ा उसने मेहताब पर एक बाद एक ताबड़तोड़ वार किए इस हमले में मेहताब बुरी तरह से घायल हो गया। पहले उसे जेल में प्राथमिक उपचार दिया गया। फिर डीडीयू अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।

जेल में कत्ल की वारदात से जेल प्रशासन सकते में आ गया। आखिर कातिल के पास हथियार आया कहां से? कैसे उसने कत्ल की खौफनाक वारदात को अंजाम दे डाला। ऐसे कई सवाल हैं, जो जेल प्रशासन पर सवाल खड़े करते हैं। फिलहाल, पुलिस ने फिर से जाकिर के खिलाफ हत्या का मामला भी दर्ज कर लिया है। तिहाड़ जेल के डीजी संदीप गोयल के मुताबिक जेल में सुरक्षा का पूरा ख्याल रखा जाता है बावजूद इसके वक्त-वक्त पर जेल के अंदर हत्या की वारदातें होती रहती हैं। 

पिछले चार वर्षों में तिहाड़ जेल में हत्या की चार वारदातों को बेरहमी से अंजाम दिया गया डीजी जेल के अनुसार वर्ष 2017 से वर्ष 2020 में अब तक हर साल तिहाड़ जेल में एक मर्डर किया गया अब प्रसाशन पर सवाल उठते है आखिर हमारा पुलिस प्रसाशन क्या कर रहा है ?


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