Wednesday, August 12, 2020

कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान सऊदी अरब आमने सामने - सऊदी अरब का पाकिस्तान को पैसे और तेल देने से इंकार


अपने ही खास और ताकतवर दोस्त को आंख दिखाना पाकिस्तान को इतना महंगा पड़ेगा यह कभी पाकिस्तान ने अपने सपने में भी नहीं सोचा था। सऊदी अरब अब पाकिस्तान को न तो कर्ज देगा और न ही उसे तेल देगा। इतना ही नहीं सऊदी अरब ने अपने पुराने कर्ज की वसूली भी शुरू कर दी है। इस तरह से सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच दशकों पुरानी दोस्ती रिश्ता आज खत्म हो गया है।

पाकिस्तान को सऊदी अरब का 1 बिलियन डॉलर का कर्ज भी इसी महीने देना होगा, जो नवंबर 2018 में सऊदी अरब द्वारा 6.2 बिलियन डॉलर के पैकेज का एक हिस्सा था। इसमें पैकेज में कुल  3 बिलियन डॉलर का ऋण और एक ऑयल क्रेडिट सुविधा थी जिसमें 3.2 बिलियन डॉलर की राशि शामिल थी। जब क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने पिछले साल फरवरी में पाकिस्तान की यात्रा की थी, तब उन्होंने पाकिस्तान के साथ यह सौदा किया था।

इस्लामिक सहयोग संगठन यानी ओआईसी 57 मुस्लिम देशों का एक समूह है जिसमें सऊदी अरब का दबदबा है। संयुक्‍त राष्‍ट्र के बाद ओआईसी दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा संगठन है।

दरअसल भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाया है, तब से ही पाकिस्तान भारत के इस कदम के खिलाफ इस्लामिक सहयोग संगठन की बैठक करने के लिए लगातार दबाव बना रहा है। इस साल फरवरी में पाकिस्तान ने सऊदी अरब से इस्लामिक सहयोग संगठन की बैठक बुलाने को कहा था मगर सऊदी अरब ने ऐसा करने से इनकार कर दिया जिसके बाद से पाकिस्तान आग-बबूला हो गया।

इसी महीने की शुरुआत में पाकिस्तान ने सऊदी अरब को धमकी देकर सबसे बड़ी गलती कर दी। पाक विदेश मंत्री कुरैशी ने सऊदी अरब के नेतृत्‍व वाले इस्लामिक सहयोग संगठन यानी ओआईसी बैठक आयोजित नहीं करने को लेकर धमकी दी थी  और इसकी सऊदी की आलोचना की थी। इतना ही नहीं पाकिस्तान के विदेश मंत्री कुरैशी ने मुस्लिम देशों के इस संगठन को तोड़ने की भी धमकी दी थी।

पाकिस्‍तान के एक लोकल न्‍यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में विदेश मंत्री कुरैशी ने कहा था, 'मैं एक बार फिर से पूरे सम्‍मान के साथ इस्लामिक सहयोग संगठन से कहना चाहता हूं कि विदेश मंत्रियों की परिषद की बैठक हमारी अपेक्षा है। अगर आप इसे बुला नहीं सकते हैं तो मैं प्रधानमंत्री इमरान खान से यह कहने के लिए बाध्‍य हो जाऊंगा कि वह ऐसे इस्‍लामिक देशों की बैठक बुलाएं जो कश्‍मीर के मुद्दे पर हमारे साथ खड़े होने के लिए तैयार हैं।'

पाकिस्तान के विदेश मंत्री कुरैशी ने तो यह तक कह दिया था कि अगर ओआईसी विदेश मंत्रियों की परिषद की बैठक बुलाने में विफल रहता है तो पाकिस्तान ओआईसी के बाहर एक सत्र का आयोजन करेगा। क्योंकि कश्मीर मसले पर पाकिस्तान अब और इंतजार नहीं कर सकता।

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