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वभ्रुवाहन एक ऐसा योद्धा जिसने महाभारत के युद्ध में कर दिया था अर्जुन का वध

आप में से बहुत ही कम ऐसे लोग होंगे जो ये जानते है कि महाभारत में अर्जुन का वध भी हुआ था और वो वध किया था वभ्रुवाहन ने।  आखिर कौन था वभ्रुवाहन। अभिमन्यु के अलावा भी अर्जुन के 3 और पुत्र थे और अपने ही पुत्र द्वारा अर्जुन महाभारत युद्ध में मारे भी गए। पर हर किसी से जीते हुए अर्जुन को इस हार में एक स्त्री ने जीवनदान दिया था।

अर्जुन की चौथी पत्नी का नाम उलूपी था। कहते हैं कि उलूपी जलपरी थी। उन्हीं ने अर्जुन को जल में हानिरहित रहने का वरदान दिया था। इसके अलावा उसी ने चित्रांगदा और अर्जुन के पुत्र वभ्रुवाहन को युद्ध की शिक्षा दी थी।  महाभारत युद्ध में अपने गुरु भीष्म पितामह को मारने के बाद ब्रह्मा-पुत्र से शापित होने के बाद उलूपी ने ही अर्जुन को शापमुक्त भी किया था और इसी युद्ध में अपने पुत्र के हाथों मारे जाने पर उलूपी ने ही अर्जुन को पुनर्जीवित भी कर दिया था।

माना जाता है कि द्रौपदी, जो पांचों पांडवों की पत्नी थीं, 1-1 साल के समय-अंतराल के लिए हर पांडव के साथ रहती थी। उस समय किसी दूसरे पांडव को द्रौपदी के आवास में घुसने की अनुमति नहीं थी। इस नियम को तोड़ने वाले को 1 साल तक देश से बाहर रहने का दंड था।

अर्जुन और द्रौपदी की 1 वर्ष की अवधि अभी-अभी समाप्त हुई थी और द्रौपदी-युधिष्ठिर के साथ का एक वर्ष का समय शुरू हुआ था। अर्जुन भूलवश द्रौपदी के आवास पर ही अपना तीर-धनुष भूल आए। पर किसी दुष्ट से ब्राह्मण के पशुओं की रक्षा के लिए लिए उन्हें उसी समय इसकी जरूरत पड़ी अत: क्षत्रिय धर्म का पालन करने के लिए तीर-धनुष लेने के लिए नियम तोड़ते हुए वह द्रौपदी के निवास में घुस गए। बाद में इसके दंडस्वरूप वे 1 साल के लिए राज्य से बाहर चले गए। इसी दौरान अर्जुन की मुलाकात उलूपी से हुई और वह अर्जुन पर मोहित हो गईं।

बाद में महाभारत युद्ध में जब अर्जुन अपने ही पुत्र वभ्रुवाहन के हाथों मारे गए तो उलूपी ने अर्जुन को दुबारा जीवित भी किया। वभ्रूवाहन कौरवों की ओर से लड़ रहा था। उसे नहीं मालूम था कि अर्जुन मेरे पिता हैं अत: जीवित होने के पश्चात अर्जुन और वभ्रुवाहन को एकसाथ लाने में भी उलूपी का बहुत बड़ा हाथ था।

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