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ग्रेग चैपल के साथ सब ने मिलकर छीनी मेरी कप्तानी और मुझे टीम से बाहर निकाला : सौरव गांगुली


टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) अध्यक्ष सौरव गांगुली ने अपने करियर के सबसे बड़े मुश्किल दौर की बात की। जैसा की हम सब जानते हैं कि सौरव गांगुली ने 8 साल तक कप्तानी की उन्होंने कप्तानी अपनी मर्जी से नहीं छोड़ी थी बल्कि उन्हें निकाला गया था। 2005 का साल सौरव गांगुली के लिए सबसे निराशा भरा साल था। सौरव गांगुली को टीम इण्डिया का सफल बल्लेबाजों में गिना जाता है।  गांगुली ने कहा कि उन्हें टीम से निकालने में सिर्फ पूर्व कोच ग्रेग चैपल ही नहीं बल्कि पूरा सिस्टम शामिल था। गांगुली का मानना है  'वो मेरे करियर का सबसे बड़ा झटका था।  मैं टीम इंडिया का कप्तान था और जिम्बाब्वे से जीतकर लौटा था और स्वदेश लौटते ही मुझे कप्तानी से हटा दिया गया था। मैंने 2007 वर्ल्ड कप भारत के लिए जीतने का सपना देखा था।'

उन्होंने बताया मेरे पास वर्ल्ड कप जितने का सपना देखने के पीछे कारण था क्योंकि इससे पहले हम 2003 वर्ल्ड कप में फाइनल में पहुंचे थे। पांच सालों तक टीम ने मेरी कप्तानी में अच्छा प्रदर्शन किया था, चाहे भारत में हो या फिर बाहर विदेशी धरती हो। इसके बाद आप अचानक मुझे टीम से ड्रॉप कर देते हैं? आप अचानक मुझे कहते हैं कि मैं वनडे इंटरनेशनल टीम का हिस्सा नहीं हूं और फिर मुझे टेस्ट टीम से भी बाहर कर दिया जाता है।



गांगुली ने कहा, 'ग्रेग चैपल ने ही यह सब शुरू किया था लेकिन मै अकेले उनको इसका दोषी नहीं ठहराऊंगा। मुझे टीम से निकालने में सभी लोग शामिल थे। टीम एक परिवार की तरह होती है। आपस में मतभेद हो सकते हैं, ग़लतफ़हमी भी हो सकती है लेकिन यह सब सुलझाया जा सकता है। लेकिन मैं दबाव में बिखरा नहीं, मेरा आत्मविश्वास खत्म नहीं हुआ।'

2005 में टीम से ड्रॉप होने के बाद गांगुली ने 2006 में दक्षिण अफ्रीकी दौरे के साथ टीम में वापसी की। इंटरनैशनल क्रिकेट में वापसी गांगुली ने रनों के साथ की और अगले दो साल में अपने करियर की कुछ यादगार पारियां खेलीं। गांगुली ने 2008 में नागपुर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला था और रिटायरमेंट की घोषणा कर दी थी।

गांगुली ने 311 वनडे इंटरनैशनल मैचों में 11363 रन और 113 टेस्ट मैचों में 7212 रन बनाए। उनके खाते में 22 वनडे इंटरनैशनल और 15 टेस्ट सेंचुरी शामिल हैं। गांगुली को महान कप्तानों में बिना जाता है, क्योंकि उन्होंने 2000 में हुए फिक्सिंग कांड के बाद टीम इंडिया को संभाला और अपनी कप्तानी में टीम को आगे बढ़ाया।

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