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बेंगलुरु हिंसा का बड़ा खुलासा - सभी पुलिसवालों को मारने का था प्लान


मंगलवार की रात को बेंगलुरु में जो हिंसा हुई वो दिल्ली में हुई हिंसा की तरह योजनाबद्ध निकली। पुलिस का कहना है की  5 दंगाइयों ने 300 लोगों का गैंग बनाया था। उनका प्लान सिर्फ सभी पुलिसवालों को जान से मारने का था। हिंसा के दौरान पुलिस को निशाना बनाने के लिए हमलावरों ने गुरिल्ला जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया। बेंगलुरु हिंसा में ऐसी घटना घटी वो सबकुछ  कई पुराने पुलिसकर्मियों ने बहुत दिनों के बाद देखा होगा। वहीं  पुलिस कर्मियों जो नए भर्ती हुए उनके लिए यह एक चौंकाने वाला अनुभव रहा। बेंगलुरु हिंसा में जो कुछ हुआ उसकी पुलिस ने कभी कल्पना भी नहीं की थी। उधर, रैपिड एक्शन फोर्स ने गुरुवार को डीजे हल्ली पुलिस स्टेशन इलाके में फ्लैग मार्च किया। इस इलाके में 15 अगस्त को सुबह 6 बजे तक धारा 144 लागू है।

 बेंगलुरु की संकरी गलियों में हिंसक भीड़ ने गुरिल्ला युद्ध जैसी टेक्निक का इस्तेमाल किया। कवलबीरसांद्रा, केजी हल्ली और डीजे हल्ली इलाके में फैली हिंसा का यह रूप शायद ही कभी किसी ने देखा होगा। हिंसा का यह क्रम मंगलवार रात पुलकेशी नगर के विधायक आर अखंडा श्रीनिवास मूर्ति के घर के सामने शुरू हुआ। जो करीब-करीब रात दो बजे तक चलता रहा। रात 10 बजे के बाद हालात बिगड़ गए क्योंकि केजी हल्ली और डीजे हल्ली पुलिस थाने पर भीड़ ने ताला लगा दिया और पुलिस वाहनों को आग लगा दी। दो स्टेशनों पर सहकर्मियों की मदद के लिए शहर के दूसरे हिस्सों से पहुंचे अतिरिक्त पुलिस बलों को हर कदम पर पत्थरों, ईंटों, बोतलों और अन्य वस्तुओं का सामना करना पड़ा।

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि स्ट्रीट लाइट्स खराब कर दी गयी  और कई स्थानों पर उन्हें अंधेरे में सड़क ब्लॉक पर हमलावरों से बातचीत करनी पड़ी। जिन वाहनों को हमलावरों ने नुकसान पहुंचाया था और  आग लगाई गई थी, उन वाहनों को पटरियों को बंद करने के लिए सड़क के बीच में धकेल दिया गया था। पुलिस कमिश्नर कमल पंत ने कहा कि 75 पुलिस अधिकारियों के साथ जब हम आगे बढ़ रहे थे, तब भी पत्थरों को पहले स्ट्रीट लाइट्स पर फेंका जा रहा था । जिससे पूरे इलाके में अंधेरा ही छा गया था। और फिर उसी ही पल पत्थर, बोतलें, टायर, लकड़ी के लॉग और ईंटें हम पर बरसने लगीं। इससे हमारे पुलिस कर्मियों को चोटें आईं और वह घायल हो गए। इसके बाद हमने हवा में फायरिंग का आदेश दिया और फायरिंग शुरू की ।

एक दमकल कर्मी ने बताया कि केजी हल्ली पुलिस स्टेशन तक पहुंचने के लिए टेनरी रोड से गुजरते  समय भीड़ से सामना हुआ। हालांकि दो फायर गाड़ियां पहले ही मौके पर पहुंच चुकी थी और वाहनों की आग बुझा रहीं थीं। स्टेशन से आधा किलोमीटर पहले ही एक भीड़ ने हमारा रास्ता रोक दिया। उन्होंने हमारी गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए। हमें बाहर निकाला गया और उनमें से कुछ ने हमें पीटना शुरू कर दिया। किस्मत अच्छी थी कि उसी समय सशस्त्र पुलिस का एक दल हमारी तरफ आता दिखा, जिसके बाद भीड़ ने हमें छोड़कर उन्हें भी घेर लिया।

एक अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि केजी हल्ली की संकरी गलियों के कारण हमलावरों को पुलिस पर हमला करने का पूरा मौका मिला। हमलावर हर जगह मौजूद थे। ये हमलावर स्थानीय नहीं थे। उन्होंने कहा कि केवल हवा में कई राउंड फायर किए जाने और आंसू गैस के गोले दागे जाने के बाद हमलावर पीछे हटने लगे। धार्मिक प्रचारक और राजनीतिक नेता भी पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

बेंगलुरु हिंसा के दौरान भीड़ पर काबू पाने के लिए पुलिस के गोली चलाने से तीन लोगों की मौत हो गई है। वहीं, राज्य सरकार ने इस पूरी हिंसा को 'सुनियोजित' बताया है। बेंगलुरु के पुलिस आयुक्त कमल पंत ने बताया कि पुलाकेशी नगर में हुए दंगों के सिलसिले में 110 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। एक ऑनलाइन पोस्ट होने के कारण मंगलवार रात को शुरू हुई हिंसा बुधवार सुबह  तक चलती रही। इसमें करीब 50 पुलिसकर्मियों सहित बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। गुस्साई भीड़ ने पुलाकेशी नगर के विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के आवास और डीजे हल्‍ली थाने को निशाना बनाया।

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